रविवार, 28 दिसंबर 2014


यह तकनीक की दुनिया में धीरे से उठने वाला कदम है। एक छोटी सी कोशिश निजी अनुभूतियों को इस तरह अभिव्यक्त करने की, उससे कुछ नया और सृजनात्मक हो सकें। यह कोशिश तो समाचार लिखते समय भी रहती है मगर प्रोफेशनल भागदौड़ में अपने विचार बहुत पीछे छूट जाते हैं। बहुत कुछ देखकर लगता है कि इस पर बात होनी चाहिए, बहुत कुछ ऐसा कि उसे देखकर लगता है अब तो कुछ किया ही जाना चाहिए, मगर यह चाहत बहुत बार एक कसक बनकर रह जाती है, यह कोशिश उसे कुछ को सामने लाने की है, बगैर किसी जिद के औऱ बगैर किसी शर्त के, कुछ अच्छा करने की कोशिश।

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