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युवाओं के आक्रोश को सही दिशा चाहिए

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जंतर - मंतर पर युवाओं ने डेरा जमा रखा है। देश भर में युवाओं का आक्रोश उबाल पर है । परीक्षाओं में पेपर लीक होने के विरोध में आंदोलन शुरू हुआ । इसके पहले भी आंदोलन होते रहे हैं मगर युवाओं के इस आक्रोश के साथ दिक्कत यह है कि जब राजनीतिक पार्टियां हस्तक्षेप करती हैं तो मुद्दा ही हाईजैक हो जाता है। भारत में इतने छात्र संगठन हैं मगर ऐसा क्यों है कि इनमें से एक भी युवाओं के लिए सामने नहीं आ रहा । आज युवाओं के पास एक भी ऐसा चेहरा ऐसा नहीं है जो उनका नेतृत्व कर सके । आज के युवाओं के सामने रोल मॉडल चुनने का संकट है । उनके आक्रोश तो है पर उसे दिशा देने वाला कोई नहीं है और न ही कोई समझने वाला है । कहीं न कहीं आत्मविश्वास अहंकार में बदल रहा है । इसकी बानगी हम होक कलरव में भी देख चुके हैं और अब जंतर - मंतर पर देख रहे हैं । युवा वर्ग बंटा हुआ है । एक वह है जो जमीन पर लड़ रहा है, व्यवस्था से लड़ रहा है। अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं, संसाधन नहीं हैं, कोई समझने वाला नहीं है और महत्वाकांक्षाएं बहुत हैं। जब वह इनको पूरा नहीं कर पाता तो यह जमा हुआ असंतोष ही आक्रोश बन ...