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मिशनरी पत्रकारिता के आवरण से पत्रकारिता को बाहर निकालिए

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30 मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस हम मनाते हैं । पत्रकारिता को मिशन, सेवा, ध्येय मानकर साहित्य से जोड़ा जाता है और मीडिया को कोसना पत्रकारिता से जुड़े आयोजनों की परम्परा बन गयी है । मैं पत्रकार हूँ तो आज मैं पत्रकार के रूप में ही बात करूँगी और मेरी कोशिश होगी कि वह बातें भी रख सकूँ जो कोई समझने को तैयार नहीं है । शिक्षा दान महादान है, साहित्य और कला समाज का दर्पण है, चिकित्सक भगवान है...ये हम सुनते आ रहे हैं मगर यथार्थ के धरातल पर सभी कार्यक्षेत्रों को प्रोफेशन मान लिया गया है और इन क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों के लिए कमाई के भरपूर मौके हैं । वेतन बोर्ड है, इस देश में संगठन हैं, परीक्षाएं होती हैं, सुविधाएं हैं, पेंशन हैं और इनके परिवारों के लिए एक सुरक्षित भविष्य है जबकि ये सभी क्षेत्र मिशन ही माने जाते रहे हैं। मेरा सवाल यह है कि जब समाज लगभग सभी कार्यक्षेत्रों के प्रति इतनी उदारता है तो पत्रकारिता को प्रोफेशन मानने में दिक्कत क्या है? हम पेशेवर होकर भी संगठित रहकर बेहतर काम कर सकते हैं । वह दिन गये जब जनोन्मुख पत्रकारिता होती थी, उसकी अंतिम झलक आपात काल में दिखी । फिर लोकपाल...

इस परिवर्तन ने सिर्फ राज्य नहीं, देश बचाया है

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बंगाल में 15 साल बाद सत्ता बदल चुकी है । सत्ता परिवर्तन को लेकर बहुत सी बातें कही जा रही हैं । जनता जिस तरह से खुशी मना रही है, वह ऐसा लग रहा है जैसे आजादी ही बंगाल को मिली है...बात सच भी है । बंगाल की राजनीतिक पार्टियां अपने स्वार्थ में इस हद तक अंधी हो चुकी हैं कि वो बंगाल को भारत का राज्य नहीं बल्कि एक स्वतंत्र देश ही समझ कर चल रही थीं और बौद्धिक वर्ग के लिए यह एक ऐसा कोना है जो सिर्फ उनका है, सिर्फ उनकी वामपंथी और धार्मिक तुष्टीकरण का ठिकाना है । सच यही है कि आप लोगों ने हिंदुओं और सनातन परंपरा को इतना उपेक्षित किया और सुनियोजित तरीके से दबाने की कोशिश की, और क्रूरता की हद तक दबाया । वो यह भूल गए कि बंगाल की मूल आत्मा सनातन है और यह बात 2026 के चुनावों में बंगाल की जनता ने याद दिला दी है । सच कहूँ तो बंगाल की जनता ने सिर्फ बंगाल को नहीं, देश को बचाया है । मुझे हैरत होती है जिस देश में हिंदुओं को काटा जा रहा है, घर और मंदिर जलाए जा रहे हैं, उसके प्रति लोगों में इतनी ममता कहाँ से आती है, मेरी नजर में यही देश द्रोह है । बुद्धिजीवियों के पैरों की जमीन खिसक गई है तो उसके पीछे उनका आहत...