आप हार गए जेन जी के रहनुमाओं

नीट के नाम पर हंगामे का अर्द्ध पटाक्षेप हो चुका है और धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षामंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। इस त्यागपत्र को सीजेपी की जीत बताया जा रहा है और विपक्ष अपनी पीठ खुद थपथपा रहा है । जिस तरह की भाषा प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल की गयी और जिस तरह की हिंसा हुई, उसे देखकर मुझे कुछ और ही लग रहा है । वामपंथ इस देश की संस्कृति, सभ्यता, पारिवारिक और सामाजिक संस्कृति के लिए दीमक बन चुके हैं और दिक्कत यह है कि चुके हुए वामपंथी शिक्षक, बुद्धिजीवी और साहित्यकार अब भी हमारे संस्थानों पर काबिज हैं । इस तरह गिर चुके हैं कि अब उठने के लिए इनको बच्चों के नन्हे कंधों का सहारा लेना पड़ रहा है। सोर्स लगाकर, नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर, फर्जी जाति और आयु प्रमाणपत्र खरीदकर, रिश्वत देकर अपने बच्चों की नौकरी लगवाकर , अपने चापलूस चेलों के लिए योग्य विद्यार्थियों के नंबर काटकर सीटें और नौकरियां दिलवाने वाले, पेपर लीक करवाकर, लीक किया गया पेपर खरीदकर भविष्य सेटल करने वाले आज युवा क्रांति के पुरोधा बने फिर रहे हैं...हद है । सिस्टम भ्रष्ट है तो उसका फायदा आपने भी उठाया है..ताली एक हाथ से नहीं बजती। एक समय था जब शिक्षक बच्चों को अनुशासन, सभ्य और मर्यादित आचरण सिखाता था । सही - गलत का मतलब समझाता था और गालियां सामान्य बात नहीं थी । सिगरेट - शराब या किसी भी तरह का नशा स्वीकार नहीं किया जाता था । माता - पिता बच्चे पर कड़ी निगरानी रखते थे मगर आधुनिकता की चकाचौंध में जैसे ही पारिवारिक व्यवस्था को खत्म किया, आंखों की शर्म मर गयी । नाम के कपड़ों को बोल्डनेस कहा जाने लगा । अब तो जन्तर - मन्तर से जो दृश्य दिखाई दे रहे हैं, उसे देखकर लड़का - लड़की का फर्क ही खत्म हो गया है । भारत के युवा भारत की ताकत थे, पश्चिमी देशों से आयातित सोशल मीडिया की चकाचौंध ने भारत की युवा शक्ति को बुरी तरह दमित किया है। जेन जी के तथाकथित सफल आन्दोलन से हम जैसों को सिर्फ निराशा मिली । आज युवाओं की जो स्थिति है, उसके जिम्मेदार उनके माता - पिता हैं और वह एकल परिवार व्यवस्था है जहां बचपन को बड़ों का सान्निध्य नहीं मिला । दादा - दादी, नाना - नानी, मौसी, बुआ, चाचा का प्यार नहीं मिला । उनको सही राह दिखाने वाला कोई नहीं है। उम्मीद है कि जिस तरह की अभद्र गालियों का समर्थन हमारे बुद्धिजीवी साहित्यकारों और ठेकेदारों ने किया, वो यही भाषा अपने लिए अपने बच्चों से सुनने को तैयार रहेंगे......बहुत से लोगों का नकाब उतरा..बच्चों को सही रास्ता दिखाने की जगह उनकी बेहूदगी का समर्थन कर आप लोग मन से उतर गए । कविता- कहानियों में स्त्री विमर्श की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली दिग्गज लेखिकाएं माँ- बहन के नाम की गालियों का भदेस भाषा कहकर समर्थन कर रही हैं....छीः। मजे की बात है कि ये वही लोग हैं जो एक लेखक को बाहर जाने के लिए कहने पर ट्रोल करने पर उतर आए थे...मेरी प्रार्थना है आपके बच्चे, आपके विद्यार्थी आपसे ऐसे ही पेश आएं...ये एक माता-पिता और शिक्षक के रूप में आपके गाल पर पड़ा तमाचा है, आपकी सबसे बड़ी पराजय है । भारत को सचमुच संयुक्त परिवार व्यवस्था की बहुत ज्यादा जरूरत है..सिर पर बड़ों का हाथ होना बहुत जरूरी है। एक बात जान लो बच्चों, जो सोशल मीडिया पर तुमको उकसा रहे हैं, क्रांतिकारी बता रहे हैं, वो खुद अपने कार्यक्रमों में मंत्रियों को बुलाते हैं..उन भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्रियों को ही, उनकी अगवानी में खड़े रहते हैं, सरकारी पुरस्कार और सुविधाएं लेते हैं और निजी तौर पर गुड बुक में ही रहते हैं....तुमने तो जोश में तोड़फोड़ कर दी..अब पुलिस जब तुमको और तुम्हारे माता-पिता को परेशान करेगी...इनमें से कोई तुम्हारे लिए आवाज नहीं उठाने वाला, कोई साधारण बच्चों के लिए खुद क्रांति नहीं करेगा, ऐसे गायब होंगे जैसे गधे के सिर से सिंग..ये फिर अपने आयोजनों के लिए सरकारी मदद की जुगाड़ में लगे होंगे...अचानक इनका फोन या तो व्यस्त होगा या बंद होगा...तुम्हारी जमानत नहीं देंगे....भविष्य तुम्हारा गया..ट्रैक रिकॉर्ड तुम्हारा खराब हुआ..इनका कुछ नहीं बिगड़ता..देखते आ रहे हैं हम.. इसलिए तथाकथित बड़ों के बहकावे में आकर कुछ मत करो..अपना रास्ता तुमको खुद तय करना है तो अपनी पढ़ाई पर फोकस करो...विरोध करो पर भाषा और हाव-भाव पर संयम रखो..क्योंकि आज जहां तुम्हारे बड़े हैं...कल वहां तुम होगे..हो सकता है सरकार में, सेना में या पुलिस में और फिर एक नयी पीढ़ी तुम्हारे सामने होगी...तुम सिर्फ विद्यार्थी नहीं, इस देश की धरोहर हो...उम्मीद हो भारत माता की.. अनुशासन सफ़लता की असली कुंजी है..अफसर या डॉक्टर बनोगे...या कुछ भी बनोगे तो भी अनुशासन, विनम्रता ही काम आती है...आगे चलकर तुम सब ही तो सम्भालोगे..ऐसे बनो की आने वाले कल में तुम्हारा उदहारण दिया जाये ईश्वर तुम्हें रास्ता दिखाएंगे

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बंगाल की शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने वाला हथौड़ा शिक्षक नियुक्ति घोटाला

दांव पर लगा एसएससी अभ्यर्थियों का भविष्य, आंखें खोलिए हुजूर

बिहार चुनाव में शराबबंदी, प्रशांत किशोर और मीडिया